Tuesday, March 29, 2011

गुर्जर झगड़ा कैसा होता है - पुरानी बात

गुर्जर झगड़ा कैसा होता है - पुरानी बात
एक बार एक बनिया अपनी घोड़ी पर बेठ कर जा रहा था ..रास्ते में उसे पैदल चलता हुआ गुर्जर मिला ..दोनों चलते चलते बात करने लगे. गुर्जर ने बनिए से कहा सेठ जी घोड़ी बड़ी शानदार है ..ये सुनकर बनिया फुल गया और उसने गुर्जर को घोड़ी की सवारी करने के लिए कहा ताकि वो घोड़ी की चाल से भी परिचित हो जाए और घोड़ी के बारे में अधिक तारीफ करने लग जाए ..
उसने गुर्जर को घोड़ी पर बेठने के लिए कहा .. अब गुर्जर बनिए की घोड़ी पर था बनिया पैदल ..थोडा आगे जाने के बाद गुर्जर घोड़ी सहित दूसरी राह जाने लगा तो बनिया बोला अरे घोड़ी तो दो मेरी ..
गुर्जर ने कहा कौनसी घोड़ी.....? ये तो मेरी घोड़ी है ....
बात बढ़ गई गुर्जर कहे घोड़ी मेरी ..
बनिया कहे मेरी ...
बात पंचायत में गई ...
पंचो ने बनिए से पूछा अगर घोड़ी तुम्हारी ही तो कोई निशानी बताओ ..
बनिए ने कहा मेरी घोड़ी की गर्दन के नीचे काला निशान है ...
पंचो ने देखा तो निशान मिल गया ..
अब बारी गुर्जर की थी उससे कहा भाई गुर्जर तुम बताओ अगर घोड़ी तुम्हारी है तो कोई निशान बताओ ..
गुर्जर ने कहा मेरी घोड़ी की पूंछ के नीचे काला तिल है .. पंचो ने देखा तो बात सही निकली ..
घोड़ी गुर्जर को दे दी गई
बनिया हैरान उसने इस प्रकार कभी ध्यान ही नहीं रखा ..
अब बनिया निराश होकर जाने लगा ...
अब गुर्जर ने उसे आवाज दी अरे सेठ जी अपनी घोड़ी ले जाओ ..आप ने पूछा गुर्जर झगड़ा कैसा होता है तो मेने उसका नमूना दिखाया ..
आज के बाद किसी गुर्जर को चुनोती मत देना .. ये तो में था बाकी महंगा पड़ जाएगा ..

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