Monday, October 3, 2011

हाय पैसा .....


हाय पैसा .....



हाय पैसा हाय पैसा
क्या क्या नाच नचाये पैसा |
इसको पाने सब हैं पागल
जाने ये क्या चीज़ है पैसा ||

जिसके पास जमा है पैसा,
उसके घर ही आये पैसा |
जिसके पास नहीं है पैसा,
उससे दूर ही जाये पैसा ||

बड़े बड़े महलों में जाकर,
हमने कुछ देखा है ऐसा |
बाबु खूब कमाए पैसा,
अम्मा खूब उड़ाए पैसा ||

झोपड़ियों में देखा जब तो ,
मंज़र कुछ पाया है ऐसा,
कमा रहा है सारा कुनबा,
फिर भी हर शय भूखे जैसा ||

बड़े बड़े बाज़ार सजे हैं ,
जिनको खूब लुभाए पैसा |
और पान की गुमठी की भी,
खासी शान बढ़ाये पैसा ||

कोई नहीं ये अब तक जाना,
क्या है चीज़ क़यामत पैसा,
है ग़रीब की रोटी पैसा ,
है अमीर की चाहत पैसा ||

क्या हैं ये धातु के टुकड़े,
और है क्या ये काग़ज़ जैसा |
जिसके बिना ना कुछ भी चलता,
लोग जिसे कहते हैं पैसा ||

Regards
Ravi Kasana
manager-technical
Delhi Transport Corporation
Vill & Po-Jawli,Ghaziabad
mob-9716016510

No comments:

Post a Comment